बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।।
मूल पाठ
अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।।
धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी।।
स्रोत अभिलेख 1.188 · पुस्तक पृ. 189, 189
भावार्थ
मूल पाठ के बादअवधपुरीमें रघुकुलशिरोमणि दशरथ नामके राजा हुए, जिनका नाम वेदोंमें विख्यात है। वे धर्म- धुरन्धर, गुणोंके भण्डार और ज्ञानी थे। उनके हृदयमें शाङ्र्गधनुष धारण करनेवाले भगवान्की भक्ति थी, और उनकी बुद्धि भी उन्हींमें लगी रहती थी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 189 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।।
English explanation
In Ayodhya there was a king, the jewel of Raghu's lineage. His name, Dasharatha, was renowned in the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधपुरीं | अयोध्या नगरी में | in the city of Ayodhya |
| रघुकुलमनि | रघुवंश के रत्न | the jewel of Raghu's lineage |
| राऊ | राजा | king |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| बिदित | प्रसिद्ध | renowned |
| तेहि | उनका | his |
| दसरथ | दशरथ | Dasharatha, king of Ayodhya |
| नाऊँ | नाम | name |
2 धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी।।
English explanation
He was an upholder of dharma, a treasury of virtues, and wise. His heart held devotion, and his mind rested on the Lord who bears the Sharnga bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरम | धर्म का | of dharma |
| धुरंधर | भार सँभालने वाले | a steadfast upholder |
| गुननिधि | गुणों के भंडार | a treasury of virtues |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| भगति | भक्ति | devotion |
| मति | मन या बुद्धि | mind |
| सारँगपानी | शार्ङ्गधनुषधारी भगवान में | on the Lord who bears the Sharnga bow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.188
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 189
- सहायक विषय
- भगवान्का वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 189, 189
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।