बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।।
मूल पाठ
बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।।
चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी।।
स्रोत अभिलेख 1.213 · पुस्तक पृ. 211, 212
भावार्थ
मूल पाठ के बादनगरकी सुन्दरताका वर्णन करते नहीं बनता। मन जहाँ जाता है; वहीं लुभा जाता (रम जाता) है। सुन्दर बाजार है, मणियोंसे बने हुए विचित्र छज्जे हैं, मानो ब्रह्माने उन्हें अपने हाथोंसे बनाया है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 211 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: The city's beauty defies description. Wherever the mind turns, it is captivated there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बनइ | संभव होता है | is possible |
| न | नहीं | not |
| बरनत | वर्णन करते | in describing |
| नगर | नगर की | of the city |
| निकाई | सुंदरता | beauty |
| जहाँ | जहाँ | wherever |
| जाइ | जाता है | goes |
| मन | मन | the mind |
| तहँइँ | वहीं | right there |
| लोभाई | मोहित हो जाता है | becomes captivated |
2 चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी।।
English explanation
The lovely markets and remarkable upper-storey buildings are adorned with jewels, as though Brahma had embellished them with his own hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारु | सुंदर | lovely |
| बजारु | बाजार | markets |
| बिचित्र | अनोखी और कलापूर्ण | remarkable and ornate |
| अँबारी | अटारियाँ; ऊपरी भवन | upper-storey buildings |
| मनिमय | मणियों से बने या सजे | made of or adorned with jewels |
| बिधि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| जनु | मानो | as though |
| स्वकर | अपने हाथों से | with his own hands |
| सँवारी | सँवारा हो | had embellished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.213
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 211
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका जनकपुरमें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 211, 212
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।