बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबहुओंसहित चारों पुत्रोंको देखकर माताएँ परमानन्दमें मग्न हो गयीं। सीताजी और श्रीरामजीकी छबिको बार-बार देखकर वे जगत्में अपने जीवनको सफल मानकर आनन्दित हो रही हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 330 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।।
पुनि पुनि सीय राम छबि देखी।।मुदित सफल जग जीवन लेखी।।
स्रोत अभिलेख 1.349 · पुस्तक पृ. 330, 331
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।।
English explanation
Seeing all four sons with their brides, the mothers are absorbed in supreme joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बधुन्ह | वधुओं के | the brides |
| समेत | साथ | with |
| देखि | देखकर | having seen |
| सुत | पुत्रों को | the sons |
| चारी | चारों | all four |
| परमानंद | परम आनंद में | in supreme joy |
| मगन | डूबी हुई | absorbed |
| महतारी | माताएँ | the mothers |
2 पुनि पुनि सीय राम छबि देखी।।मुदित सफल जग जीवन लेखी।।
English explanation
Repeatedly beholding Sita and Rama’s beauty, the mothers rejoice and consider their life in this world fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| सीय | सीता की | of Sita, Rama’s bride |
| राम | राम की | of Rama, Sita’s bridegroom |
| छबि | शोभा | beauty |
| देखी | देखकर | having beheld |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| सफल | सार्थक | fulfilled |
| जग | संसार में | in the world |
| जीवन | अपना जीवन | their life |
| लेखी | माना | considered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.349
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 330
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 330, 331
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।