बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे बार-बार आरती कर रही हैं। उस प्रेम और महान् आनन्दको कौन कह सकता है! अनेकों प्रकारके आभूषण, रत्न और वस्त्र तथा अगणित प्रकारकी अन्य वस्तुएँ निछावर कर रही हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 330 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।।
भूषन मनि पट नाना जाती।।करही निछावरि अगनित भाँती।।
स्रोत अभिलेख 1.349 · पुस्तक पृ. 330, 331
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।।
English explanation
AI-generated meaning draft: They repeatedly perform the welcoming lamp ceremony. Who can describe the extent of their love and joy?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करती हैं | they perform |
| आरती | दीपों से मंगल-आरती | the auspicious lamp ceremony |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बारा | बार | times |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| प्रमोदु | हर्ष और आनंद | delight and joy |
| कहै | बता सकता है | can describe |
| को | कौन | who |
| पारा | सीमा या पूरा विस्तार | the limit or full extent |
2 भूषन मनि पट नाना जाती।।करही निछावरि अगनित भाँती।।
English explanation
They offer ornaments, gems, and garments of many kinds as ceremonial gifts in countless ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| मनि | रत्न | gems |
| पट | वस्त्र | garments |
| नाना | अनेक | many |
| जाती | प्रकार के | of kinds |
| करही | करती हैं | they make |
| निछावरि | मंगलार्थ अर्पण | ceremonial gift offerings |
| अगनित | अनगिनत | countless |
| भाँती | ढंग से | in ways |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.349
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 330
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 330, 331
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।