बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिनको कठोर वचनरूपी वज्र सदा प्यारा लगता है और जो हजार आँखोंसे दूसरोंके दोषोंको देखते हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 24 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।
स्रोत अभिलेख 1.4 · पुस्तक पृ. 23, 24
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।
English explanation
He always delights in words as harsh as a thunderbolt and watches others’ faults with a thousand eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन | words |
| बज्र | वज्र जैसे कठोर | thunderbolt-like and harsh |
| जेहि | जिसे | to whom |
| सदा | हमेशा | always |
| पिआरा | प्रिय | dear |
| सहस | हजार | a thousand |
| नयन | आँखों से | with eyes |
| पर | दूसरों के | others’ |
| दोष | दोष | faults |
| निहारा | देखता है | observes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 24
- सहायक विषय
- खल-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 23, 24
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।