बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजी भाइयों और इष्ट-मित्रोंको बुलाकर साथ ले लेते हैं और नित्य वनमें जाकर शिकार खेलते हैं। मनमें पवित्र समझकर मृगोंको मारते हैं और प्रतिदिन लाकर राजा (दशरथजी) को दिखलाते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 203 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।
पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।।
स्रोत अभिलेख 1.205 · पुस्तक पृ. 203, 204
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।
English explanation
Rama calls his brothers and friends to accompany him and goes to the forest daily to hunt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंधु | भाइयों को | brothers |
| सखा | मित्रों को | friends |
| संग | साथ | along |
| लेहिं | लेते हैं | takes |
| बोलाई | बुलाकर | having called |
| बन | वन में | in the forest |
| मृगया | शिकार | hunting |
| नित | प्रतिदिन | daily |
| खेलहिं | खेलते हैं | engages in as sport |
| जाई | जाकर | having gone |
2 पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।।
English explanation
Knowing inwardly which deer are pure, Rama kills them and brings them to show the king each day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावन | पवित्र | pure |
| मृग | मृगों को | deer |
| मारहिं | मारते हैं | kills |
| जियँ | मन में | in his heart |
| जानी | जानकर | having recognized |
| दिन | दिन | day |
| प्रति | प्रत्येक | each |
| नृपहि | राजा दशरथ को | to King Dasharatha |
| देखावहिं | दिखाते हैं | shows |
| आनी | लाकर | having brought |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.205
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 203
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 203, 204
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।