बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंदउँ बालरूप सोई रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं उन्हीं श्रीरामचन्द्रजीके बालरूपकी वन्दना करता हूँ, जिनका नाम जपनेसे सब सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं। मङ्गलके धाम, अमङ्गलके हरनेवाले और श्रीदशरथजीके आँगनमें खेलनेवाले वे (बालरूप) श्रीरामचन्द्रजी मुझपर कृपा करें॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 125 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बंदउँ बालरूप सोई रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू।।
मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।
स्रोत अभिलेख 1.112 · पुस्तक पृ. 125, 125
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1बंदउँ बालरूप सोई रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू।।
English explanation
I bow to that same Rama in his child form, by chanting whose name all spiritual attainments become readily accessible.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं वंदना करता हूँ | I bow to; I offer homage |
| बालरूप | बालक के रूप में | in his child form |
| सोई | उन्हीं | that same |
| रामू | भगवान राम को | to Lord Rama |
| सब | सभी | all |
| सिधि | सिद्धियाँ; साधना की उपलब्धियाँ | spiritual attainments and powers |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily accessible |
| जपत | जपने से | by chanting |
| जिसु | जिनका | whose |
| नामू | नाम | name |
2मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।
English explanation
May Rama, the abode of auspiciousness and remover of misfortune, who plays in Dasharatha's courtyard, be moved with compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगल | शुभता; कल्याण | auspiciousness; well-being |
| भवन | धाम; निवास | abode |
| अमंगल | अशुभ; अनिष्ट | misfortune; inauspiciousness |
| हारी | हरण करने वाले | remover of |
| द्रवउ | दया से द्रवित हों | may he be moved with compassion |
| सो | वे; वही राम | he; that same Rama |
| दसरथ | राम के पिता दशरथ के | of Dasharatha, Rama's father |
| अजिर | आँगन में | in the courtyard |
| बिहारी | विहार करने वाले; खेलने वाले | one who plays or sports |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 125
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 125, 125
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।