बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें। जिमि भुजंग बिनु रजु पहिचानें।।
मूल पाठ
झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें। जिमि भुजंग बिनु रजु पहिचानें।।
जेहि जानें जग जाइ हेराई। जागें जथा सपन भ्रम जाई।।
स्रोत अभिलेख 1.112 · पुस्तक पृ. 125, 125
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसके बिना जाने झूठ भी सत्य मालूम होता है, जैसे बिना पहचाने रस्सीमें साँपका भ्रम हो जाता है; और जिसके जान लेनेपर जगत्का उसी तरह लोप हो जाता है, जैसे जागनेपर स्वप्रका भ्रम जाता रहता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 125 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें। जिमि भुजंग बिनु रजु पहिचानें।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Without knowing him, even the unreal world appears real, just as a snake appears when a rope is not recognized.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| झूठेउ | झूठा भी; मिथ्या जगत भी | even the unreal world |
| सत्य | सच्चा प्रतीत होता है | appears real |
| जाहि | जिन्हें; यहाँ राम को | whom; here, Rama |
| बिनु | बिना | without |
| जानें | जाने; पहचान किए | knowing; recognizing |
| जिमि | जैसे | just as |
| भुजंग | साँप | a snake |
| बिनु | बिना | without |
| रजु | रस्सी | a rope |
| पहिचानें | पहचाने | recognizing |
2जेहि जानें जग जाइ हेराई। जागें जथा सपन भ्रम जाई।।
English explanation
On knowing him, the world's illusory appearance vanishes, just as the illusion of a dream disappears upon waking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिन्हें; यहाँ राम को | whom; here, Rama |
| जानें | जान लेने पर | upon knowing |
| जग | जगत; यहाँ उसकी भ्रमात्मक प्रतीति | the world; here, its illusory appearance |
| जाइ | जाता है | goes; becomes |
| हेराई | लुप्त हो; ओझल हो | lost from view; vanished |
| जागें | जागने पर | upon waking |
| जथा | जैसे | just as |
| सपन | स्वप्न का | of a dream |
| भ्रम | भ्रम | illusion |
| जाई | मिट जाता है | disappears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 125
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 125, 125
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।