बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।
मूल पाठ
बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।
तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी। धींग धरमध्वज धंधक धोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 33, 33
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो श्रीरामजीके भक्त कहलाकर लोगोंको ठगते हैं, जो धन (लोभ), क्रोध और कामके गुलाम हैं और जो धींगाधींगी करनेवाले, धर्मध्वजी (धर्मकी झूठी ध्वजा फहरानेवाले—दम्भी) और कपटके धन्धोंका बोझ ढोनेवाले हैं, संसारके ऐसे लोगोंमें सबसे पहले मेरी गिनती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 33 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।
English explanation
These deceivers call themselves devotees of Rama, yet are servants of gold, anger, and desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंचक | छल करने वाले | deceivers |
| भगत | भक्त | devotees |
| कहाइ | कहलाते हैं | have themselves called |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| के | के | of |
| किंकर | दास; सेवक | servants; slaves |
| कंचन | सोना; धन | gold; wealth |
| कोह | क्रोध | anger |
| काम | कामना; कामवासना | desire; lust |
| के | के | of |
2 तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी। धींग धरमध्वज धंधक धोरी।।
English explanation
Among them, I rank foremost in the world: brazen, parading religion, and a leader among schemers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन लोगों के | those people |
| महँ | बीच; में | among |
| प्रथम | पहली; सबसे आगे | first; foremost |
| रेख | रेखा; स्थान | rank; position |
| जग | संसार में | in the world |
| मोरी | मेरी | mine |
| धींग | ढीठ; धृष्ट | brazen; impudent |
| धरमध्वज | धर्म का दिखावा करने वाला | one who flaunts religion hypocritically |
| धंधक | छल-प्रपंच करने वाला | schemer; trickster |
| धोरी | अगुआ; प्रमुख | leader; foremost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 33
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 33, 33
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