बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयदि मैं अपने सब अवगुणोंको कहने लगूँ तो कथा बहुत बढ़ जायगी और मैं पार नहीं पाऊँगा। इससे मैंने बहुत कम अवगुणोंका वर्णन किया है। बुद्धिमान् लोग थोड़ेहीमें समझ लेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 33 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।।
ताते मैं अति अलप बखाने। थोरे महुँ जानिहहिं सयाने।।
स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 33, 33
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।।
English explanation
If I recount all my faults, the account will keep growing, and I will never reach its end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| अपने | अपने | my own |
| अवगुन | दोष; दुर्गुण | faults; vices |
| सब | सभी | all |
| कहऊँ | मैं कहूँ | I recount |
| बाढ़इ | बढ़ेगी | will grow |
| कथा | विवरण; कथा | account; narrative |
| पार | अंत | end |
| नहिं | नहीं | not |
| लहऊँ | मैं पा सकूँ | I can reach |
2 ताते मैं अति अलप बखाने। थोरे महुँ जानिहहिं सयाने।।
English explanation
Therefore I have described very little; the discerning will understand from these few words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसलिए | therefore |
| मैं | मैंने | I |
| अति | बहुत | very |
| अलप | थोड़ा | little |
| बखाने | वर्णन किया है | have described |
| थोरे | थोड़े कथन | these few words |
| महुँ | में; से | in; from |
| जानिहहिं | समझ लेंगे | will understand |
| सयाने | समझदार लोग | the discerning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 33
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 33, 33
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।