बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।
मूल पाठ
फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।
सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।।
स्रोत अभिलेख 1.179 · पुस्तक पृ. 180, 180
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब रावणने घूम-फिरकर सारा नगर देखा, उसकी [स्थानसम्बन्धी] चिन्ता मिट गयी और उसे बहुत ही सुख हुआ। उस पुरीको स्वाभाविक ही सुन्दर और [बाहरवालोंके लिये] दुर्गम अनुमान करके रावणने वहाँ अपनी राजधानी कायम की॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 180 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।
English explanation
Ravana went around and saw the whole city. His anxiety vanished, and he felt great happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरि | घूमकर | going around |
| सब | पूरा | the whole |
| नगर | नगर | city |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
| देखा | देखा | saw |
| गयउ | दूर हो गया | vanished |
| सोच | चिंता | anxiety |
| सुख | सुख | happiness |
| भयउ | हुआ | arose |
| बिसेषा | बहुत अधिक | great |
2 सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।।
English explanation
Judging the city beautiful and naturally difficult to access, Ravana made his capital there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| अगम | दुर्गम | difficult to access |
| अनुमानी | समझकर | judging it to be |
| कीन्हि | बनाई | made |
| तहाँ | वहाँ | there |
| रावन | रावण ने | Ravana |
| रजधानी | राजधानी | his capital |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.179
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 180
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 180, 180
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।