बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलौट जानेमें लज्जा मालूम होती है और करते कुछ बनता नहीं। आखिर मनमें मरनेका निश्चय करके उसने उपाय रचा। तुरंत ही सुन्दर ऋतुराज वसन्तको प्रकट किया। फूले हुए नये-नये वृक्षोंकी कतारें सुशोभित हो गयीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 101 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।।
प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा।।
स्रोत अभिलेख 1.86 · पुस्तक पृ. 100, 101
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।।
English explanation
Turning back would be shameful, yet he could manage no action. Resolving to face death, the god of desire devised a plan in his mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरत | लौटने में | in turning back |
| लाज | लज्जा | shame |
| कछु | कुछ भी | anything |
| करि | कर | do |
| नहिं | नहीं | not |
| जाई | किया जा सकता | could be done |
| मरनु | मरना; मृत्यु | dying; death |
| ठानि | निश्चय करके | having resolved upon |
| मन | मन में | in his mind |
| रचेसि | उसने रचा | he devised |
| उपाई | उपाय; योजना | a means; a plan |
2 प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा।।
English explanation
The god of desire immediately brought forth lovely spring, the king of seasons. A row of fresh, flowering trees shone in beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रगटेसि | उसने प्रकट किया | he brought forth |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| रुचिर | सुंदर; मनोहर | lovely; charming |
| रितुराजा | ऋतुओं के राजा वसंत को | spring, the king of seasons |
| कुसुमित | फूलों से खिले हुए | in bloom |
| नव | नए; ताजे | new; fresh |
| तरु | वृक्ष | trees |
| राजि | पंक्ति; समूह | row; array |
| बिराजा | शोभित हुआ | shone in beauty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 101
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 100, 101
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।