बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसज्जनगण इस बातको मुझ दासकी ढिठाई या केवल काव्योक्ति न समझें। मैं अपने मनके विश्वास, प्रेम और रुचिकी बात कहता हूँ। [निर्गुण और सगुण] दोनों प्रकारके ब्रह्मका ज्ञान अग्निके समान है। निर्गुण उस अप्रकट अग्निके समान है जो काठके अंदर है, परन्तु दीखती नहीं; और सगुण उस प्रकट अग्निके समान है जो प्रत्यक्ष दीखती है। [तत्त्वत: दोनों एक ही हैं; केवल प्रकट- अप्रकटके भेदसे भिन्न मालूम होती हैं। इसी प्रकार निर्गुण और सगुण तत्त्वत: एक ही हैं। इतना होनेपर भी] दोनों ही जाननेमें बड़े कठिन हैं, परन्तु नामसे दोनों सुगम हो जाते हैं। इसीसे मैंने नामको [निर्गुण] ब्रह्मसे और [सगुण] रामसे बड़ा कहा है, ब्रह्म व्यापक है, एक है, अविनाशी है; सत्ता, चैतन्य और आनन्दकी घनराशि है॥ २-३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 45 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की।।
एकु दारुगत देखिअ एकू। पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू।।
उभय अगम जुग सुगम नाम तें। कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें।।
ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी। सत चेतन धन आनँद रासी।।
स्रोत अभिलेख 1.23 · पुस्तक पृ. 45, 45
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की।।
English explanation
Let good people not regard this as the servant’s presumption; I express my heart’s conviction, love, and inclination.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रोढ़ि | धृष्टता; बढ़कर बोलना | presumption; bold assertion |
| सुजन | सज्जन लोग | good people |
| जनि | मत | do not |
| जानहिं | समझें | regard |
| जन | इस सेवक की | this servant |
| की | की | of |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I express |
| प्रतीति | विश्वास | conviction |
| प्रीति | प्रेम | love |
| रुचि | रुचि; लगाव | inclination |
| मन | मन | heart |
| की | की | of |
2 एकु दारुगत देखिअ एकू। पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू।।
English explanation
Fire is latent in wood in one form and visible in another; the distinction between Brahman’s two forms should be understood similarly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकु | एक रूप | one form |
| दारुगत | लकड़ी में स्थित | latent in wood |
| देखिअ | दिखाई देता है | is seen |
| एकू | दूसरा रूप | the other form |
| पावक | अग्नि | fire |
| सम | के समान | like |
| जुग | दोनों | both |
| ब्रह्म | ब्रह्म के स्वरूप | forms of Brahman |
| बिबेकू | भेद की समझ | discernment of the distinction |
3 उभय अगम जुग सुगम नाम तें। कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें।।
English explanation
Both forms are inaccessible, yet both become accessible through the Name; thus I have called the Name greater than attributeless Brahman and Rama in manifest form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उभय | दोनों | both |
| अगम | पहुँच से परे | inaccessible |
| जुग | दोनों | both |
| सुगम | सहज सुलभ | readily accessible |
| नाम | राम का नाम | the Name of Rama |
| तें | से; द्वारा | through |
| कहेउँ | मैंने कहा | I have said |
| नामु | राम का नाम | the Name of Rama |
| बड़ | बड़ा; श्रेष्ठ | greater |
| ब्रह्म | निर्गुण ब्रह्म | attributeless Brahman |
| राम | सगुण रूप में भगवान राम | Lord Rama in manifest form |
| तें | से | than |
4 ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी। सत चेतन धन आनँद रासी।।
English explanation
The one, all-pervading, imperishable Brahman is truth, consciousness, and an abundance of bliss. The reading ‘धन’ is uncertain here; it likely intends ‘घन,’ meaning a concentrated embodiment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापकु | सर्वव्यापक | all-pervading |
| एकु | एक; अद्वितीय | one |
| ब्रह्म | परम सत्य, ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
| सत | सत्य; अस्तित्वस्वरूप | truth; being |
| चेतन | चेतन; चेतनास्वरूप | conscious; consciousness |
| धन | सघन स्वरूप; यहाँ शुद्ध चेतना का स्वरूप। | A concentrated embodiment; here, pure consciousness. |
| आनँद | आनंद | bliss |
| रासी | राशि; भंडार | abundance; treasury |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 45
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 45, 45
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।