बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनिर्गुण और सगुण—ब्रह्मके दो स्वरूप हैं। ये दोनों ही अकथनीय, अथाह, अनादि और अनुपम हैं। मेरी सम्मतिमें नाम इन दोनोंसे बड़ा है, जिसने अपने बलसे दोनोंको अपने वशमें कर रखा है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 45 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा।।
मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें।।
स्रोत अभिलेख 1.23 · पुस्तक पृ. 45, 45
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा।।
English explanation
Brahman has two forms, without attributes and with attributes; both are indescribable, unfathomable, beginningless, and incomparable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगुन | गुणों से रहित; निर्गुण | without attributes |
| सगुन | गुणों सहित; सगुण | with attributes |
| दुइ | दो | two |
| ब्रह्म | परम सत्य, ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| सरूपा | स्वरूप | forms |
| अकथ | जिसका वर्णन न हो सके | indescribable |
| अगाध | जिसकी गहराई न मापी जा सके | unfathomable |
| अनादि | जिसका आरंभ न हो | beginningless |
| अनूपा | जिसकी कोई उपमा न हो | incomparable |
2 मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें।।
English explanation
In my view, the Name is greater than both, having brought both under its sway by its own power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरें | मेरे | my |
| मत | मत में | in the opinion of |
| बड़ | बड़ा; श्रेष्ठ | greater |
| नामु | राम का नाम | the Name of Rama |
| दुहू | दोनों स्वरूपों | both forms |
| तें | से | than |
| किए | कर लिया है | has brought |
| जेहिं | जिसने | which |
| जुग | दोनों | both |
| निज | अपने | its own |
| बस | वश में | under sway |
| निज | अपने ही | its own |
| बूतें | बल से | by power |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 45
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 45, 45
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।