बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी।।
मूल पाठ
अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी।।
नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें।।
स्रोत अभिलेख 1.23 · पुस्तक पृ. 45, 45
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसे विकाररहित प्रभुके हृदयमें रहते भी जगत्के सब जीव दीन और दुखी हैं। नामका निरूपण करके (नामके यथार्थ स्वरूप, महिमा, रहस्य और प्रभावको जानकर)नामका जतन करनेसे (श्रद्धापूर्वक नामजपरूपी साधन करनेसे) वही ब्रह्म ऐसे प्रकट हो जाता है जैसे रत्नके जाननेसे उसका मूल्य॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 45 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी।।
English explanation
Though such an unchanging Lord is present in the heart, all beings in the world are helpless and suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसे | such |
| प्रभु | प्रभु | the Lord |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| अछत | विद्यमान रहते हुए भी | despite being present |
| अबिकारी | विकार या परिवर्तन से रहित | unchanging |
| सकल | सभी | all |
| जीव | जीव | living beings |
| जग | जगत में | in the world |
| दीन | दीन; असहाय | helpless |
| दुखारी | दुखी | suffering |
2 नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें।।
English explanation
Through understanding the Name and practicing it, that very Lord becomes manifest, as a gem makes its value apparent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाम | राम के नाम का | of Rama’s Name |
| निरूपन | निरूपण; अर्थ की समझ | exposition; understanding |
| नाम | राम के नाम की | of Rama’s Name |
| जतन | साधना; प्रयत्न | practice; effort |
| तें | से | through |
| सोउ | वही प्रभु भी | that very Lord too |
| प्रगटत | प्रकट होते हैं | becomes manifest |
| जिमि | जैसे | as |
| मोल | मूल्य | value |
| रतन | रत्न | a gem |
| तें | से | through |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 45
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 45, 45
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।