बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।।
मूल पाठ
प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।।
करि पूजा मान्यता बड़ाई। जनवासे कहुँ चले लवाई।।
स्रोत अभिलेख 1.306 · पुस्तक पृ. 288, 289
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा दशरथजीने प्रेमसहित सब वस्तुएँ ले लीं, फिर उनकी बख्शीशें होने लगीं और वे याचकोंको दे दी गयीं। तदनन्तर पूजा, आदर-सत्कार और बड़ाई करके अगवान लोग उनको जनवासेकी ओर लिवा ले चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 288 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।।
English explanation
The king accepted everything with affection and gave the gifts he received to the petitioners.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम | affection |
| समेत | सहित | with |
| रायँ | राजा ने | the king |
| सबु | सब कुछ | everything |
| लीन्हा | स्वीकार किया | accepted |
| भै | मिली; प्राप्त हुई | was received |
| बकसीस | भेंट; उपहार | gifts |
| जाचकन्हि | याचकों को | to petitioners |
| दीन्हा | दे दिया | gave |
2 करि पूजा मान्यता बड़ाई। जनवासे कहुँ चले लवाई।।
English explanation
After ceremonial welcome, respectful honors, and praise, they escorted them toward the wedding guests’ lodging.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| पूजा | पूजा; आदरपूर्ण स्वागत | ceremonial welcome |
| मान्यता | मान-सम्मान | respectful honors |
| बड़ाई | प्रशंसा; बड़ाई | praise |
| जनवासे | बरात के ठहरने के स्थान | the wedding guests’ lodging |
| कहुँ | की ओर | toward |
| चले | चले | proceeded |
| लवाई | साथ लेकर; ले जाते हुए | escorting; taking along |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.306
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 288
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 288, 289
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।