बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशिवजीकी भक्ति, ज्ञान और धर्मसे युक्त वचनरचना सुनकर प्रभु रामचन्द्रजी सन्तुष्ट हो गये। प्रभुने कहा—हे हर! आपकी प्रतिज्ञा पूरी हो गयी। अब हमने जो कहा है उसे हृदयमें रखना॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 93 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना।।
कह प्रभु हर तुम्हार पन रहेऊ। अब उर राखेहु जो हम कहेऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.77 · पुस्तक पृ. 93, 93
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना।।
English explanation
The Lord was pleased to hear Shiva’s words, composed with devotion, discernment, and righteousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| तोषेउ | प्रसन्न हुए | was pleased |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| संकर | शंकर अर्थात शिव के | Shiva’s |
| बचना | वचन | words |
| भक्ति | भक्ति | devotion |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| धर्म | धर्म | righteousness |
| जुत | से युक्त | endowed with |
| रचना | वचनों की रचना | composition of the utterance |
2 कह प्रभु हर तुम्हार पन रहेऊ। अब उर राखेहु जो हम कहेऊ।।
English explanation
The Lord said, “Shiva, your vow has been upheld. Now keep what I have said in your heart.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| हर | हे शिव | O Shiva |
| तुम्हार | आपका | your |
| पन | प्रण; प्रतिज्ञा | vow; pledge |
| रहेऊ | निभ गया; अक्षुण्ण रहा | has been upheld |
| अब | अब | now |
| उर | हृदय में | in your heart |
| राखेहु | रखिए | keep |
| जो | जो | what |
| हम | मैंने | I |
| कहेऊ | कहा है | have said |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 93
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका शिवजीसे विवाहके लिये अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 93, 93
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।