बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी।।
मूल पाठ
अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी।।
तबहिं सप्तरिषि सिव पहिं आए। बोले प्रभु अति बचन सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 1.77 · पुस्तक पृ. 93, 93
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार कहकर श्रीरामचन्द्रजी अन्तर्धान हो गये। शिवजीने उनकी वह मूॢत अपने हृदयमें रख ली। उसी समय सप्तॢष शिवजीके पास आये। प्रभु महादेवजीने उनसे अत्यन्त सुहावने वचन कहे—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 93 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी।।
English explanation
Having said this, the Lord disappeared. Shiva kept that very form of the Lord in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंतरधान | अदृश्य | invisible |
| भए | हो गए | became |
| अस | ऐसा | thus |
| भाषी | कहकर | having spoken |
| संकर | शिव ने | Shiva |
| सोइ | उसी | that very |
| मूरति | स्वरूप को | form |
| उर | हृदय में | in his heart |
| राखी | रख लिया | kept |
2 तबहिं सप्तरिषि सिव पहिं आए। बोले प्रभु अति बचन सुहाए।।
English explanation
Just then the seven sages came to Shiva. Lord Shiva spoke very pleasing words to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तबहिं | तभी | just then |
| सप्तरिषि | सात ऋषि | the seven sages |
| सिव | शिव के | Shiva |
| पहिं | पास | to; near |
| आए | आए | came |
| बोले | बोले; कहे | spoke |
| प्रभु | प्रभु शिव ने | Lord Shiva |
| अति | अत्यंत | very |
| बचन | वचन | words |
| सुहाए | सुंदर; मनोहर | pleasing; gracious |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 93
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका शिवजीसे विवाहके लिये अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 93, 93
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।