बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[भाइयोंमें] सबसे पहले मैं श्रीभरतजीके चरणोंको प्रणाम करता हूँ, जिनका नियम और व्रत वर्णन नहीं किया जा सकता तथा जिनका मन श्रीरामजीके चरणकमलोंमें भौंरेकी तरह लुभाया हुआ है, कभी उनका पास नहीं छोड़ता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 39 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना।।
राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू।।
स्रोत अभिलेख 1.17 · पुस्तक पृ. 39, 40
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना।।
English explanation
I first bow to Bharata’s feet; his disciplines and vows cannot be adequately described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनवउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| प्रथम | पहले | first |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| के | के | of |
| चरना | चरणों को | to the feet |
| जासु | जिनके | whose |
| नेम | अनुशासन के नियम | disciplines |
| ब्रत | व्रत | vows |
| जाइ | किया जा सकता | can be done |
| न | नहीं | not |
| बरना | वर्णन | describing |
2 राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू।।
English explanation
His mind, like an eager bee, never leaves the presence of Rama’s lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| मन | मन | mind |
| जासू | जिनका | whose |
| लुबुध | लोभ से आकृष्ट | eagerly drawn |
| मधुप | भौंरा | bee |
| इव | की तरह | like |
| तजइ | छोड़ता है | leaves |
| न | नहीं | not |
| पासू | सान्निध्य | proximity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 39
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 39, 40
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।