बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू।।
मूल पाठ
प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू।।
जोग भोग महँ राखेउ गोई। राम बिलोकत प्रगटेउ सोई।।
स्रोत अभिलेख 1.17 · पुस्तक पृ. 39, 40
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं परिवारसहित राजा जनकजीको प्रणाम करता हूँ, जिनका श्रीरामजीके चरणोंमें गूढ़ प्रेम था, जिसको उन्होंने योग और भोगमें छिपा रखा था, परन्तु श्रीरामचन्द्रजीको देखते ही वह प्रकट हो गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 39 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू।।
English explanation
AI draft: I bow to King Janaka together with his family, whose love for Rama’s feet is deep.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनवउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| परिजन | परिवार के लोग | family members |
| सहित | के साथ | together with |
| बिदेहू | विदेह राजा जनक को | to Janaka, king of Videha |
| जाहि | जिन्हें | who has |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| गूढ़ | गहरा, भीतर छिपा | deep, inwardly concealed |
| सनेहू | प्रेम | love |
2 जोग भोग महँ राखेउ गोई। राम बिलोकत प्रगटेउ सोई।।
English explanation
He had kept that love hidden amid spiritual discipline and worldly enjoyment; on seeing Rama, that very love became manifest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोग | योग-साधना | spiritual discipline |
| भोग | सांसारिक सुख-भोग | worldly enjoyment |
| महँ | में | amid |
| राखेउ | रखा था | had kept |
| गोई | छिपाकर | concealed |
| राम | राम को | Rama |
| बिलोकत | देखते ही | upon seeing |
| प्रगटेउ | प्रकट हुआ | became manifest |
| सोई | वही प्रेम | that very love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 39
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 39, 40
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।