बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूजहि माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।।
मूल पाठ
पूजहि माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।।
भरद्वाज आश्रम अति पावन। परम रम्य मुनिबर मन भावन।।
स्रोत अभिलेख 1.44 · पुस्तक पृ. 66, 67
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीवेणीमाधवजीके चरणकमलोंको पूजते हैं और अक्षयवटका स्पर्शकर उनके शरीर पुलकित होते हैं। भरद्वाजजीका आश्रम बहुत ही पवित्र, परम रमणीय और श्रेष्ठ मुनियोंके मनको भानेवाला है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 66 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पूजहि माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।।
English explanation
They worship Madhava’s lotus-like feet, and on touching the imperishable banyan, their bodies thrill with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजहि | पूजा करते हैं | worship |
| माधव | भगवान माधव के | of Madhava, Lord Vishnu |
| पद | चरण | feet |
| जलजाता | कमल जैसे | lotus-like |
| परसि | छूकर | having touched |
| अखय | अक्षय, अविनाशी | imperishable |
| बटु | वट-वृक्ष | banyan tree |
| हरषहिं | हर्षित होते हैं | thrill with joy |
| गाता | शरीर | bodies |
2 भरद्वाज आश्रम अति पावन। परम रम्य मुनिबर मन भावन।।
English explanation
Bharadvaja’s hermitage is very holy, exceedingly beautiful, and pleasing to the minds of eminent sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरद्वाज | ऋषि भरद्वाज का | of Sage Bharadvaja |
| आश्रम | आश्रम | hermitage |
| अति | अत्यंत | very |
| पावन | पवित्र | holy |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| रम्य | सुंदर और सुखद | beautiful and delightful |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनियों के | of eminent sages |
| मन | मन को | to the minds |
| भावन | भाने वाला | pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 66
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 66, 67
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