बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा। जाहिं जे मज्जन तीरथराजा।।
मूल पाठ
तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा। जाहिं जे मज्जन तीरथराजा।।
मज्जहिं प्रात समेत उछाहा। कहहिं परसपर हरि गुन गाहा।।
स्रोत अभिलेख 1.44 · पुस्तक पृ. 66, 67
भावार्थ
मूल पाठ के बादतीर्थराज प्रयागमें जो स्नान करने जाते हैं उन ऋषि-मुनियोंका समाज वहाँ (भरद्वाजके आश्रममें) जुटता है। प्रात:काल सब उत्साहपूर्वक स्नान करते हैं और फिर परस्पर भगवान्के गुणोंकी कथाएँ कहते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 67 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा। जाहिं जे मज्जन तीरथराजा।।
English explanation
The sages and seers who go to bathe at Prayag, king of pilgrimage places, gather there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहाँ | वहाँ, भरद्वाज के आश्रम में | there, at Bharadvaja’s hermitage |
| होइ | होता है | forms |
| मुनि | मुनियों का | of sages |
| रिषय | ऋषियों का | of seers |
| समाजा | समुदाय | assembly |
| जाहिं | जाते हैं | go |
| जे | जो | who |
| मज्जन | स्नान के लिए | for bathing |
| तीरथराजा | तीर्थराज प्रयाग में | to Prayag, king of pilgrimage places |
2 मज्जहिं प्रात समेत उछाहा। कहहिं परसपर हरि गुन गाहा।।
English explanation
They bathe enthusiastically in the morning and recount to one another songs of Hari’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मज्जहिं | स्नान करते हैं | bathe |
| प्रात | सुबह | in the morning |
| समेत | के साथ | with |
| उछाहा | उत्साह | enthusiasm |
| कहहिं | कहते हैं | recount |
| परसपर | एक-दूसरे से | to one another |
| हरि | भगवान हरि के | of Hari, the Lord |
| गुन | गुणों की | of the virtues |
| गाहा | गाथाएँ | songs of praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 67
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 66, 67
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