बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा। सकल लोक जग पावनि गंगा।।
मूल पाठ
पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा। सकल लोक जग पावनि गंगा।।
तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी। कीन्हहु प्रस्न जगत हित लागी।।
स्रोत अभिलेख 1.112 · पुस्तक पृ. 125, 125
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो तुमने श्रीरघुनाथजीकी कथाका प्रसङ्ग पूछा है, जो कथा समस्त लोकोंके लिये जगत्को पवित्र करनेवाली गङ्गाजीके समान है। तुमने जगत्के कल्याणके लिये ही प्रश्न पूछे हैं। तुम श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें प्रेम रखनेवाली हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 125 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा। सकल लोक जग पावनि गंगा।।
English explanation
You have asked about the episodes of Rama's story; this story is a Ganges that purifies all realms and the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूँछेहु | तुमने पूछे हैं | you have asked about |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम की | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| कथा | कथा; चरित | story; account of his deeds |
| प्रसंगा | प्रसंग; कथा के विषय | episodes; topics of the story |
| सकल | समस्त | all |
| लोक | लोकों को | realms; their inhabitants |
| जग | जगत को | the world |
| पावनि | पवित्र करने वाली | purifying |
| गंगा | गंगा नदी; कथा का रूपक | the Ganges, a metaphor for the story |
2 तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी। कीन्हहु प्रस्न जगत हित लागी।।
English explanation
You are devoted to Rama's feet; you have asked this question for the welfare of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम के | of Rama, hero of the Raghu lineage |
| चरन | चरणों में | at his feet |
| अनुरागी | प्रेम और भक्ति रखने वाली | lovingly devoted |
| कीन्हहु | तुमने किया है | you have made; you have asked |
| प्रस्न | प्रश्न | a question |
| जगत | संसार के | of the world |
| हित | कल्याण | welfare |
| लागी | के लिए | for the sake of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 125
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 125, 125
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।