बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई।।
मूल पाठ
पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई।।
अति बिस्तार चारु गच ढारी। बिमल बेदिका रुचिर सँवारी।।
स्रोत अभिलेख 1.224 · पुस्तक पृ. 220, 221
भावार्थ
मूल पाठ के बाददोनों भाई नगरके पूरब ओर गये; जहाँ धनुषयज्ञके लिये [रंग] भूमि बनायी गयी थी। बहुत लंबा-चौड़ा सुन्दर ढाला हुआ पक्का आँगन था, जिसपर सुन्दर और निर्मल वेदी सजायी गयी थी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 220 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई।।
English explanation
AI-generated draft meaning: The two brothers went to the eastern side of the city, where grounds had been prepared for the bow ceremony.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर की | of the city |
| पूरब | पूर्व | eastern |
| दिसि | दिशा में | in the direction |
| गे | गए | went |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई—राम और लक्ष्मण | brothers—Rama and Lakshmana |
| जहँ | जहाँ | where |
| धनुमख | धनुष-यज्ञ | the bow ceremony |
| हित | के लिए | for |
| भूमि | भूमि | grounds |
| बनाई | तैयार की गई थी | had been prepared |
2 अति बिस्तार चारु गच ढारी। बिमल बेदिका रुचिर सँवारी।।
English explanation
A beautiful lime-plastered floor covered a very extensive area, and a spotless ceremonial platform had been attractively adorned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | very |
| बिस्तार | विस्तृत क्षेत्र में | over an extensive area |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| गच | चूने का पक्का फर्श | lime-plastered flooring |
| ढारी | डाला गया था | had been laid |
| बिमल | निर्मल | spotless |
| बेदिका | वेदिका; ऊँचा समारोह-मंच | raised ceremonial platform |
| रुचिर | सुंदर ढंग से | beautifully |
| सँवारी | सजाई गई थी | had been adorned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.224
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 220
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 220, 221
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।