बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।।
मूल पाठ
पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।।
सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने।।
स्रोत अभिलेख 1.333 · पुस्तक पृ. 317, 318
भावार्थ
मूल पाठ के बादजनकपुरवासियोंने सुना कि बारात जायगी, तब वे व्याकुल होकर एक-दूसरेसे बात पूछने लगे। जाना सत्य है, यह सुनकर सब ऐसे उदास हो गये मानो सन्ध्याके समय कमल सकुचा गये हों॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 317 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।।
English explanation
Hearing that the wedding procession would depart, the townspeople anxiously asked one another about it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरबासी | नगर के निवासी | townspeople |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| चलिहि | चलेगी; प्रस्थान करेगी | will depart |
| बराता | बारात | the wedding procession |
| बूझत | पूछते हुए | asking |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| परस्पर | एक-दूसरे से | of one another |
| बाता | यह बात; समाचार | the matter; the news |
2 सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने।।
English explanation
Hearing that the departure was certain, everyone wept, like lotuses closing at dusk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्य | सच्चा; निश्चित | confirmed; certain |
| गवनु | प्रस्थान | departure |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सब | सभी | everyone |
| बिलखाने | बिलखने लगे | began to weep |
| मनहुँ | मानो | as though |
| साँझ | साँझ में | at dusk |
| सरसिज | कमल | lotuses |
| सकुचाने | सिमट गए; बंद हो गए | contracted; closed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.333
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 317
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 317, 318
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।