बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।
मूल पाठ
पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।
करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.348 · पुस्तक पृ. 329, 330
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब अयोध्यावासियोंने राजाको जोहार (वन्दना) की। श्रीरामचन्द्रजीको देखते ही वे सुखी हो गये। सब मणियाँ और वस्त्र निछावर कर रहे हैं। नेत्रोंमें [प्रेमाश्रुओंका] जल भरा है और शरीर पुलकित हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 330 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।
English explanation
Then the townspeople saluted the king; at the sight of Rama they became happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरबासिन्ह | नगरवासियों ने | the townspeople |
| तब | तब | then |
| राय | राजा दशरथ को | King Dasharatha |
| जोहारे | प्रणाम किया | saluted |
| देखत | देखते ही | upon seeing |
| रामहि | राम को | Rama |
| भए | हो गए | became |
| सुखारे | सुखी | happy |
2 करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।।
English explanation
They offer jewels and garments as celebratory gifts; tears fill their eyes and their bodies thrill with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | make |
| निछावरि | न्योछावर, मंगल-भेंट | ceremonial offerings |
| मनिगन | मणियों के समूह | collections of jewels |
| चीरा | वस्त्र | garments |
| बारि | जल, आनंद के आँसू | water, tears of joy |
| बिलोचन | आँखों में | in their eyes |
| पुलक | रोमांच | thrill, hair standing on end |
| सरीरा | शरीरों में | in their bodies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.348
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 330
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 329, 330
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