बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनगरकी स्त्रियाँ आनन्दित होकर आरती कर रही हैं और सुन्दर चारों कुमारोंको देखकर हॢषत हो रही हैं। पालकियोंके सुन्दर परदे हटा-हटाकर वे दुलहिनोंको देखकर सुखी होती हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 330 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।
सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।
स्रोत अभिलेख 1.348 · पुस्तक पृ. 329, 330
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।
English explanation
The joyful women of the city perform arati and rejoice on seeing the four noble princes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आरति | आरती | ritual waving of lamps |
| करहिं | करती हैं | perform |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| पुर | नगर की | of the city |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| हरषहिं | हर्षित होती हैं | rejoice |
| निरखि | देखकर | on seeing |
| कुँअर | राजकुमारों को | the princes |
| बर | श्रेष्ठ, सुंदर | noble, handsome |
| चारी | चारों | all four |
2 सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।
English explanation
Drawing aside the curtains of the lovely palanquins, they delight in seeing the brides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिबिका | पालकियों के | of the palanquins |
| सुभग | सुंदर | lovely |
| ओहार | परदे | curtains |
| उघारी | खोलकर | drawing aside |
| देखि | देखकर | on seeing |
| दुलहिनिन्ह | दुलहिनों को | the brides |
| होहिं | होती हैं | become |
| सुखारी | सुखी | happy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.348
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 330
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 329, 330
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।