बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशरीरपर पीली झँगुली पहनायी हुई है। उनका घुटनों और हाथोंके बल चलना मुझे बहुत ही प्यारा लगता है। उनके रूपका वर्णन वेद और शेषजी भी नहीं कर सकते। उसे वही जानता है जिसने कभी स्वप्रमें भी देखा हो॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 199 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।।
रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा।।
स्रोत अभिलेख 1.199 · पुस्तक पृ. 198, 199
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।।
English explanation
His mother dresses him in a yellow infant's tunic; his crawling on knees and hands delights me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पीत | पीला | yellow |
| झगुलिआ | शिशु का झबला | an infant's loose tunic |
| तनु | शरीर पर | on the body |
| पहिराई | पहनाती है | puts on him |
| जानु | घुटनों के बल | on the knees |
| पानि | हाथों के बल | on the hands |
| बिचरनि | चलना या रेंगना | moving or crawling |
| मोहि | मुझे | to me |
| भाई | सुहाता है | is pleasing |
2 रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा।।
English explanation
Even the Vedas and Shesha cannot describe that beauty; only one who has seen it, even in a dream, knows it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रूप | रूप और सुंदरता | form and beauty |
| सकहिं | सकते हैं | are able |
| नहिं | नहीं | not |
| कहि | कह या वर्णन कर | tell or describe |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| सेषा | शेष, दिव्य नाग | Shesha, the divine serpent |
| सो | वही | that person alone |
| जानइ | जानता है | knows |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| जेहि | जिसने | who |
| देखा | देखा है | has seen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.199
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 199
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 198, 199
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।