बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।
मूल पाठ
पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।
रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ।।
स्रोत अभिलेख 1.243 · पुस्तक पृ. 236, 237
भावार्थ
मूल पाठ के बादपीली चौकोनी टोपियाँ सिरोंपर सुशोभित हैं, जिनके बीच-बीचमें फूलोंकी कलियाँ बनायी (काढ़ी) हुई हैं। शङ्खके समान सुन्दर (गोल) गलेमें मनोहर तीन रेखाएँ हैं, जो मानो तीनों लोकोंकी सुन्दरताकी सीमा [को बता रही] हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 237 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।
English explanation
Yellow, four-cornered caps adorn their heads, with flower buds arranged at intervals.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पीत | पीली | yellow |
| चौतनीं | चौकोनी टोपियाँ | four-cornered caps |
| सिरन्हि | सिरों पर | on their heads |
| सुहाई | सुशोभित हैं | look lovely |
| कुसुम | फूलों की | of flowers |
| कलीं | कलियाँ | buds |
| बिच | बीच | at intervals |
| बीच | बीच में | here and there |
| बनाईं | सजाई गई हैं | have been arranged |
2 रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ।।
English explanation
Their lovely, conch-like necks are adorned with graceful lines, as though they were the utmost limit of beauty in all three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रेखें | रेखाओं से | with lines |
| रुचिर | सुशोभित; सुंदर | graceful |
| कंबु | शंख-समान | conch-like |
| कल | सुंदर | lovely |
| गीवाँ | गर्दनें | necks |
| जनु | मानो | as though |
| त्रिभुवन | तीनों लोकों की | of the three worlds |
| सुषमा | सुंदरता | beauty |
| की | की | of |
| सीवाँ | चरम सीमा | utmost limit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.243
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 237
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 236, 237
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।