बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।।
मूल पाठ
पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।।
बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा।।
स्रोत अभिलेख 1.4 · पुस्तक पृ. 23, 24
भावार्थ
मूल पाठ के बादजैसे ओले खेतीका नाश करके आप भी गल जाते हैं, वैसे ही वे दूसरोंका काम बिगाडऩेके लिये अपना शरीरतक छोड़ देते हैं। मैं दुष्टोंको [हजार मुखवाले] शेषजीके समान समझकर प्रणाम करता हूँ, जो पराये दोषोंका हजार मुखोंसे बड़े रोषके साथ वर्णन करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 23 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।।
English explanation
They give up even their bodies to harm others, just as hailstones crush crops and then melt away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | others’ |
| अकाजु | अहित | harm |
| लगि | के लिए | for the sake of |
| तनु | शरीर | body |
| परिहरहीं | त्याग देते हैं | give up |
| जिमि | जैसे | just as |
| हिम | बर्फ के | of ice |
| उपल | पत्थर; ओले | stones; hailstones |
| कृषी | फसल | crops |
| दलि | कुचलकर | having crushed |
| गरहीं | गल जाते हैं | melt away |
2 बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा।।
English explanation
I bow to the wicked person as to an angry Shesha: he recounts others’ faults with a thousand mouths.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| खल | दुष्ट व्यक्ति | the wicked person |
| जस | जैसे | like |
| सेष | हजार मुखों वाले शेषनाग | Shesha, the thousand-headed serpent |
| सरोषा | क्रोधयुक्त | angry |
| सहस | हजार | a thousand |
| बदन | मुखों से | with mouths |
| बरनइ | वर्णन करता है | recounts |
| पर | दूसरों के | others’ |
| दोषा | दोष | faults |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 23
- सहायक विषय
- खल-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 23, 24
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।