बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।।
मूल पाठ
तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।।
उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके।।
स्रोत अभिलेख 1.4 · पुस्तक पृ. 23, 24
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो तेज (दूसरोंको जलानेवाले ताप) में अग्रि और क्रोधमें यमराजके समान हैं, पाप और अवगुणरूपी धनमें कुबेरके समान धनी हैं, जिनकी बढ़ती सभीके हितका नाश करनेके लिये केतु (पुच्छल तारे) के समान है, और जिनके कुम्भकर्णकी तरह सोते रहनेमें ही भलाई है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 23 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।।
English explanation
In scorching intensity they are like fire, and in anger like Yama; rich in the wealth of sins and faults, they resemble Kubera.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेज | दाहक तेज में | in scorching intensity |
| कृसानु | अग्नि के समान | like fire |
| रोष | क्रोध में | in anger |
| महिषेसा | भैंसे के स्वामी यमराज जैसे | like Yama, lord of the buffalo mount |
| अघ | पाप | sins |
| अवगुन | दुर्गुण | faults |
| धन | धनरूपी संपदा | wealth |
| धनी | धनवान | rich |
| धनेसा | धन के स्वामी कुबेर जैसे | like Kubera, lord of wealth |
2उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके।।
English explanation
Their rise is as ominous for everyone’s welfare as a comet’s appearance; they are better asleep, like Kumbhakarna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदय | प्रकट होना; उदय | rise or appearance |
| केत | धूमकेतु | comet |
| सम | जैसा | like |
| हित | भलाई के लिए | for the welfare |
| सबही | सब लोगों | everyone |
| के | के | of |
| कुंभकरन | लंबी नींद के लिए प्रसिद्ध रावण का भाई कुंभकर्ण | Kumbhakarna, Ravana’s brother famed for long sleep |
| सम | के समान | like |
| सोवत | सोते हुए | while asleep |
| नीके | अच्छे | better |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 23
- सहायक विषय
- खल-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 23, 24
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।