बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दज्यों ही राजा परोसने लगा, उसी काल [कालकेतुकृत] आकाशवाणी हुई—हे ब्राह्मणो! उठ- उठकर अपने घर जाओ; यह अन्न मत खाओ। इस [के खाने] में बड़ी हानि है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 175 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला।।
बिप्रबृंद उठि उठि गृह जाहू। है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू।।
स्रोत अभिलेख 1.173 · पुस्तक पृ. 175, 175
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला।।
English explanation
Just as the king began serving the meal, a voice sounded from the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परुसन | परोसने | to serve food |
| जबहिं | जैसे ही | as soon as |
| लाग | लगा | began |
| महिपाला | राजा | the king |
| भै | हुई | occurred |
| अकासबानी | आकाश से वाणी | a voice from the sky |
| तेहि | उसी | that very |
| काला | समय | time |
2 बिप्रबृंद उठि उठि गृह जाहू। है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू।।
English explanation
Brahmins, rise, rise and go home! There is great danger of harm; do not eat this food.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रबृंद | हे ब्राह्मणों के समूह | O assembled Brahmins |
| उठि | उठो | rise |
| उठि | उठो | rise |
| गृह | घर | home |
| जाहू | जाओ | go |
| है | है | there is |
| बड़ि | बड़ी | great |
| हानि | हानि | harm |
| अन्न | यह भोजन | this food |
| जनि | मत | do not |
| खाहू | खाओ | eat |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.173
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 175
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 175, 175
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।