बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम सती असुराधिप नारी। तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी।।
मूल पाठ
परम सती असुराधिप नारी। तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी।।
स्रोत अभिलेख 1.123 · पुस्तक पृ. 134, 135
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस दैत्यराजकी स्त्री परम सती (बड़ी ही पतिव्रता) थी। उसीके प्रतापसे त्रिपुरासुर [जैसे अजेय शत्रु] का विनाश करनेवाले शिवजी भी उस दैत्यको नहीं जीत सके॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 135 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परम सती असुराधिप नारी। तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी।।
English explanation
The demon king’s wife was supremely faithful to her husband; through the power of her fidelity, Shiva could not defeat him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | supremely |
| सती | पतिव्रता | faithful to her husband |
| असुराधिप | असुरों के राजा की | of the demon king |
| नारी | पत्नी | wife |
| तेहि | उसी पतिव्रत के | of that fidelity |
| बल | बल से | through the power |
| ताहि | उस असुर को | that demon |
| न | नहीं | not |
| जितहिं | जीत पाते थे | could defeat |
| पुरारी | त्रिपुर-विनाशक शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.123
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 135
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 134, 135
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