बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।।
मूल पाठ
परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।।
गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.235 · पुस्तक पृ. 229, 230
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब परमप्रेमकी कोमल स्याही बनाकर उनके स्वरूपको अपने सुन्दर चित्तरूपी भित्तिपर चित्रित कर लिया। सीताजी पुन: भवानीजीके मन्दिरमें गयीं और उनके चरणोंकी वन्दना करके हाथ जोड़कर बोलीं—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 229 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।।
English explanation
He made tender ink imbued with supreme love and inscribed Janaki’s image upon the beautiful wall of his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत; सर्वोच्च | supreme; utmost |
| प्रेममय | प्रेम से भरी | imbued with love |
| मृदु | कोमल | tender |
| मसि | स्याही | ink |
| कीन्ही | बनाई | made |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| चित | चित्त की | of his heart |
| भीतीं | दीवार पर | upon the wall |
| लिख | अंकित करके | inscribing |
| लीन्ही | अपने भीतर अंकित कर ली | took into himself by inscribing |
2 गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी।।
English explanation
Sita returned to Bhavani’s temple, bowed at her feet, and spoke with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गई | सीता गईं | Sita went |
| भवानी | देवी पार्वती के | of Bhavani, Goddess Parvati |
| भवन | मंदिर में | to the temple |
| बहोरी | फिर | again |
| बंदि | वंदना करके | having bowed in reverence |
| चरन | चरणों की | at her feet |
| बोली | बोलीं | spoke |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.235
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 229
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 229, 230
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