बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।।
मूल पाठ
जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।।
प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी।।
स्रोत अभिलेख 1.235 · पुस्तक पृ. 229, 230
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजीके धनुषको कठोर जानकर वे विसूरती (मनमें विलाप करती) हुई हृदयमें श्रीरामजीकी साँवली मूॢतको रखकर चलीं। (शिवजीके धनुषकी कठोरताका स्मरण आनेसे उन्हें चिन्ता होती थी कि ये सुकुमार रघुनाथजी उसे कैसे तोड़ेंगे, पिताके प्रणकी स्मृतिसे उनके हृदयमें क्षोभ था ही, इसलिये मनमें विलाप करने लगीं। प्रेमवश ऐश्वर्यकी विस्मृति हो जानेसे ही ऐसा हुआ; फिर भगवान्के बलका स्मरण आते ही वे हॢषत हो गयीं और साँवली छबिको हृदयमें धारण करके चलीं।) प्रभु श्रीरामजीने जब सुख, स्नेह, शोभा और गुणोंकी खान श्रीजानकीजीको जाती हुई जाना,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 229 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।।
English explanation
AI draft: Knowing Shiva’s bow to be formidable, Sita grew troubled and departed with Rama’s dark-hued image held in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | knowing |
| कठिन | कठोर; झुकाना कठिन | unyielding; difficult to bend |
| सिवचाप | शिव का धनुष | Shiva’s bow |
| बिसूरति | चिंता करती हुई | feeling troubled |
| चली | सीता चलीं | Sita departed |
| राखि | रखकर | holding |
| उर | हृदय में | in her heart |
| स्यामल | साँवली | dark-hued |
| मूरति | राम की छवि | Rama’s image |
2 प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी।।
English explanation
When Lord Rama perceived Janaki, the treasure of joy, affection, beauty, and virtues, departing—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| जब | जब | when |
| जात | जाती हुई | departing |
| जानकी | सीता को | Sita, daughter of Janaka |
| जानी | जाना; देखा | perceived |
| सुख | सुख की | of joy |
| सनेह | स्नेह की | of affection |
| सोभा | शोभा की | of beauty |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| खानी | खान; भंडार | a mine; treasure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.235
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 229
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 229, 230
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।