बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।।
मूल पाठ
पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।।
बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी।।
स्रोत अभिलेख 1.61 · पुस्तक पृ. 80, 81
भावार्थ
मूल पाठ के बादक्योंकि उनके हृदयमें पतिद्वारा त्यागी जानेका बड़ा भारी दु:ख था, पर अपना अपराध समझकर वे कुछ कहती न थीं। आखिर सतीजी भय, संकोच और प्रेमरसमें सनी हुई मनोहर वाणीसे बोलीं—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 81 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।।
English explanation
Sati’s heart held deep sorrow at being forsaken by her husband, but, considering her own offense, she did not voice her wish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | पति द्वारा; शिव द्वारा | by her husband, Shiva |
| परित्याग | त्यागे जाने से | from being forsaken |
| हृदय | हृदय में | in her heart |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| भारी | बहुत गहरा | deep; great |
| कहइ | कहती हैं; इच्छा व्यक्त करती हैं | says; voices her wish |
| न | नहीं | not |
| निज | अपना | her own |
| अपराध | अपराध; दोष | offense; fault |
| बिचारी | विचारकर | having considered |
2 बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी।।
English explanation
Sati spoke in charming words suffused with fear, hesitation, and the feeling of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोली | बोलीं | spoke |
| सती | सती, शिव की पत्नी | Sati, Shiva’s wife |
| मनोहर | मन को भाने वाली | charming |
| बानी | वाणी; शब्द | speech; words |
| भय | भय | fear |
| संकोच | संकोच; झिझक | hesitation; reserve |
| प्रेम | प्रेम | love |
| रस | भावरस | emotional essence |
| सानी | सनी हुई; भरी हुई | suffused; steeped |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 81
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 80, 81
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