बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।।
मूल पाठ
पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।।
तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई।।
स्रोत अभिलेख 1.83 · पुस्तक पृ. 97, 98
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम जाकर कामदेवको शिवजीके पास भेजो, वह शिवजीके मनमें क्षोभ उत्पन्न करे(उनकी समाधि भङ्ग करे)। तब हम जाकर शिवजीके चरणोंमें सिर रख देंगे और जबरदस्ती (उन्हें राजी करके) विवाह करा देंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 98 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।।
English explanation
Send the god of desire to Shiva, so that he may stir Shankara’s mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पठवहु | भेजो | send |
| कामु | कामदेव को | the god of desire |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सिव | शिव के | Shiva |
| पाहीं | पास | to; near |
| करै | उत्पन्न करें | may produce |
| छोभु | क्षोभ; चंचलता | agitation; disturbance |
| संकर | शंकर के; शिव के | of Shankara, Shiva |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | in |
2 तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई।।
English explanation
Then we will go, bow our heads to Shiva, and insist on arranging his marriage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हम | हम | we |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सिवहि | शिव को | to Shiva |
| सिर | सिर | our heads |
| नाई | नवाकर; झुकाकर | having bowed |
| करवाउब | करवाएँगे | will arrange; will have performed |
| बिबाहु | विवाह | the marriage |
| बरिआई | बलपूर्वक आग्रह से | through forceful insistence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 98
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 97, 98
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।