बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकारसे भले ही देवताओंका हित हो [और तो कोई उपाय नहीं है] सबने कहा—यह सम्मति बहुत अच्छी है। फिर देवताओंने बड़े प्रेमसे स्तुति की, तब विषम (पाँच) बाण धारण करनेवाला और मछलीके चिह्नयुक्त ध्वजावाला कामदेव प्रकट हुआ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 98 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।।
अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू।।
स्रोत अभिलेख 1.83 · पुस्तक पृ. 97, 98
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।।
English explanation
In this way the gods’ welfare will be well served. Everyone calls the advice very good—the reading “मर” in the second clause is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | विधि; रीति से | by this means; in this way |
| भलेहि | भली तरह; अवश्य | well; surely |
| देवहित | देवताओं का हित | the gods’ welfare |
| होई | होगा | will be accomplished |
| मर | मत; सलाह या प्रस्ताव। | Advice; the proposed plan. |
| अति | बहुत | very |
| नीक | अच्छा | good |
| कहइ | कहता है | says; calls |
| सबु | हर | every |
| कोई | व्यक्ति | person |
2 अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू।।
English explanation
The gods offered praise with great affection, and the god of desire appeared—the bearer of an odd number of arrows and a fish-emblazoned banner.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| कीन्हि | की | offered |
| अति | बहुत | great |
| हेतू | प्रेम से | with affection |
| प्रगटेउ | प्रकट हुए | appeared |
| बिषमबान | विषम संख्या के पाँच बाणों वाले कामदेव | the god of desire, bearer of five arrows |
| झषकेतू | मछली-चिह्नित ध्वजा वाले कामदेव | the god of desire with a fish-emblazoned banner |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 98
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 97, 98
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।