बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपवित्र चैत्रका महीना था, नवमी तिथि थी। शुक्लपक्ष और भगवान्का प्रिय अभिजित् मुहूत्र्त था। दोपहरका समय था। न बहुत सरदी थी, न धूप (गरमी) थी। वह पवित्र समय सब लोकोंको शान्ति देनेवाला था॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 191 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।
मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा।।
स्रोत अभिलेख 1.191 · पुस्तक पृ. 191, 192
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।
English explanation
It was the sacred ninth lunar day of Madhu, the month of Chaitra, in the bright fortnight, at the Abhijit time dear to Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नौमी | नवमी; नौवीं चंद्र-तिथि | the ninth lunar day |
| तिथि | चंद्र-तिथि | lunar day |
| मधु | चैत्र महीने का नाम ‘मधु’ | Madhu, a name for the month of Chaitra |
| मास | महीना | month |
| पुनीता | पवित्र | sacred |
| सुकल | शुक्ल; चंद्रमा के बढ़ने वाला | bright; waxing |
| पच्छ | पक्ष; पंद्रह तिथियों की अवधि | lunar fortnight |
| अभिजित | अभिजित नामक शुभ मुहूर्त | the auspicious Abhijit time |
| हरिप्रीता | हरि को प्रिय | dear to Hari, the Lord |
2 मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा।।
English explanation
It was midday, with neither excessive cold nor excessive heat—a sacred time bringing repose to the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मध्यदिवस | मध्याह्न; दोपहर | midday |
| अति | अत्यधिक | excessive |
| सीत | ठंड | cold |
| न | नहीं; न यह, न वह | not; neither … nor |
| घामा | धूप की गरमी | the sun's heat |
| पावन | पवित्र | sacred |
| काल | समय | time |
| लोक | संसार; संसार के प्राणी | the world and its beings |
| बिश्रामा | विश्राम और शांति देने वाला | bringing repose and peace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.191
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 191
- सहायक विषय
- राजा दशरथका पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियोंका गर्भवती होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 191, 192
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।