बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा। भयउ रमापति पद अनुरागा।।
मूल पाठ
निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा। भयउ रमापति पद अनुरागा।।
सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी।।
स्रोत अभिलेख 1.125 · पुस्तक पृ. 136, 137
भावार्थ
मूल पाठ के बादपर्वत, नदी और वनके [सुन्दर] विभागोंको देखकर नारदजीका लक्ष्मीकान्त भगवान्के चरणोंमें प्रेम हो गया। भगवान्का स्मरण करते ही उन (नारद मुनि) के शापकी (जो शाप उन्हें दक्ष प्रजापतिने दिया था और जिसके कारण वे एक स्थानपर नहीं ठहर सकते थे) गति रुक गयी और मनके स्वाभाविक ही निर्मल होनेसे उनकी समाधि लग गयी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 136 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा। भयउ रमापति पद अनुरागा।।
English explanation
Seeing the mountain, river, and woodland landscape, Narada felt love arise for the feet of Vishnu, Lakshmi’s consort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरखि | देखकर | beholding |
| सैल | पर्वत | mountain |
| सरि | नदी | river |
| बिपिन | वन | forest |
| बिभागा | विस्तार और प्रदेश | expanses and regions |
| भयउ | उत्पन्न हुआ | arose |
| रमापति | लक्ष्मी के पति विष्णु के | of Vishnu, Lakshmi’s consort |
| पद | चरणों के प्रति | toward the feet |
| अनुरागा | प्रेम | devoted love |
2 सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी।।
English explanation
As Narada remembered Hari, the wandering imposed by a curse was checked; his naturally pure mind entered meditative absorption.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | while remembering |
| हरिहि | हरि विष्णु को | Hari, Vishnu |
| श्राप | शाप से उत्पन्न | imposed by the curse |
| गति | निरंतर घूमने की गति | wandering movement |
| बाधी | रुक गई | was checked |
| सहज | स्वभावतः | by nature |
| बिमल | निर्मल | pure |
| मन | मन | mind |
| लागि | लग गया | became absorbed |
| समाधी | ध्यान की गहन अवस्था में | in meditative absorption |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 136
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 136, 137
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।