बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई।।
मूल पाठ
निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई।।
जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीं। निरखहिं राम रूप अनुरागीं।।
स्रोत अभिलेख 1.22 · पुस्तक पृ. 217, 218
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्वभावहीसे सुन्दर दोनों भाइयोंको देखकर वे लोग नेत्रोंका फल पाकर सुखी हो रहे हैं। युवती स्त्रियाँ घरके झरोखोंसे लगी हुई प्रेमसहित श्रीरामचन्द्रजीके रूपको देख रही हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 217 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई।।
English explanation
Seeing the two naturally beautiful brothers, they become happy, their eyes having attained their fulfillment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरखि | देखकर | seeing |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| होहिं | होते हैं | become |
| सुखी | सुखी | happy |
| लोचन | नेत्रों का | of their eyes |
| फल | फल, सार्थकता | fulfillment |
| पाई | पाकर | having obtained |
2 जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीं। निरखहिं राम रूप अनुरागीं।।
English explanation
Young women gathered at the windows of their houses and gazed lovingly at Rama’s beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जुबतीं | युवतियाँ | young women |
| भवन | घरों के | of the houses |
| झरोखन्हि | झरोखों पर | at the windows |
| लागीं | आ लगीं | gathered |
| निरखहिं | निहारती हैं | gaze at |
| राम | राम का | of Rama |
| रूप | रूप-सौंदर्य | beauty |
| अनुरागीं | प्रेममग्न होकर | full of affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 217
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 217, 218
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।