बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं परसपर बचन सप्रीती। सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती।।
मूल पाठ
कहहिं परसपर बचन सप्रीती। सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती।।
सुर नर असुर नाग मुनि माहीं। सोभा असि कहुँ सुनिअति नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.22 · पुस्तक पृ. 217, 218
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे आपसमें बड़े प्रेमसे बातें कर रही हैं—हे सखी! इन्होंने करोड़ों कामदेवोंकी छबिको जीत लिया है। देवता, मनुष्य, असुर, नाग और मुनियोंमें ऐसी शोभा तो कहीं सुननेमें भी नहीं आती॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 217 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहहिं परसपर बचन सप्रीती। सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती।।
English explanation
They say affectionately to one another, “Friend, these two have surpassed the beauty of millions of love-gods.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहती हैं | say |
| परसपर | एक-दूसरे से | to one another |
| बचन | बातें | words |
| सप्रीती | प्रेमपूर्वक | affectionately |
| सखि | हे सखी | O friend |
| इन्ह | इन दोनों ने | these two |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions of |
| काम | कामदेवों की | love-gods’ |
| छबि | सुंदरता | beauty |
| जीती | को पीछे छोड़ दिया | have surpassed |
2 सुर नर असुर नाग मुनि माहीं। सोभा असि कहुँ सुनिअति नाहीं।।
English explanation
Among gods, humans, demons, serpent beings, and sages, such beauty is unheard of anywhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं | gods |
| नर | मनुष्यों | humans |
| असुर | असुरों | demons |
| नाग | नागों, सर्पजातीय दिव्य प्राणियों | divine serpent beings |
| मुनि | मुनियों | sages |
| माहीं | में | among |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| असि | ऐसी | such |
| कहुँ | कहीं | anywhere |
| सुनिअति | सुनने में आती | is heard of |
| नाहीं | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 217
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 217, 218
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