बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीकी शोभाको निरखकर हृदयमें धर लो। अपने मनको साँप और इनकी मूॢतको मणि बना लो। इस प्रकार सबको नेत्रोंका फल देते हुए सब राजकुमार राजमहलमें गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 319 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।।
एहि बिधि सबहि नयन फलु देता। गए कुअँर सब राज निकेता।।
स्रोत अभिलेख 1.335 · पुस्तक पृ. 319, 319
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।।
English explanation
Behold Rama's beauty and hold it in your heart; make your mind a serpent and his form its jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरखि | निहारकर | having beheld |
| राम | राम की | of Rama |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरहू | धारण करो | hold |
| निज | अपने | your own |
| मन | मन को | mind |
| फनि | सर्प | a serpent |
| मूरति | राम की रूप-छवि को | Rama's form |
| मनि | मणि | its jewel |
| करहू | बना लो | make |
2 एहि बिधि सबहि नयन फलु देता। गए कुअँर सब राज निकेता।।
English explanation
Thus granting everyone the fulfillment of their sight, all the princes went to the royal palace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| सबहि | सभी को | to everyone |
| नयन | आँखों का | of sight |
| फलु | फल; सार्थकता | fulfillment |
| देता | देते हुए | giving |
| गए | गए | went |
| कुअँर | राजकुमार | princes |
| सब | सभी | all |
| राज | राजकीय | royal |
| निकेता | महल में | to the palace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.335
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 319
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 319, 319
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