बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज भ्रम नहिं समुझहिं अग्यानी। प्रभु पर मोह धरहिं जड़ प्रानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअज्ञानी मनुष्य अपने भ्रमको तो समझते नहीं और वे मूर्ख प्रभु श्रीरामचन्द्रजीपर उसका आरोप करते हैं, जैसे आकाशमें बादलोंका पर्दा देखकर कुविचारी (अज्ञानी) लोग कहते हैं कि बादलोंने सूर्यको ढक लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 129 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज भ्रम नहिं समुझहिं अग्यानी। प्रभु पर मोह धरहिं जड़ प्रानी।।
जथा गगन घन पटल निहारी। झाँपेउ मानु कहहिं कुबिचारी।।
स्रोत अभिलेख 1.117 · पुस्तक पृ. 129, 130
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज भ्रम नहिं समुझहिं अग्यानी। प्रभु पर मोह धरहिं जड़ प्रानी।।
English explanation
AI-drafted interpretation: The ignorant do not recognize their own delusion; uncomprehending beings attribute delusion to the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपना | their own |
| भ्रम | भ्रम | delusion |
| नहिं | नहीं | not |
| समुझहिं | समझते हैं | understand |
| अग्यानी | अज्ञानी लोग | ignorant people |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पर | पर | to; upon |
| मोह | मोह या अज्ञान | delusion or ignorance |
| धरहिं | आरोप लगाते हैं | attribute |
| जड़ | विवेकहीन | uncomprehending |
| प्रानी | प्राणी | beings |
2 जथा गगन घन पटल निहारी। झाँपेउ मानु कहहिं कुबिचारी।।
English explanation
As, on seeing a layer of clouds in the sky, misguided people say that the sun has been covered. The reading ‘मानु’ is uncertain; this translation assumes the likely intended ‘भानु’.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जथा | जैसे | just as |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| घन | बादलों की | of clouds |
| पटल | परत | layer |
| निहारी | देखकर | on seeing |
| झाँपेउ | ढक गया है | has been covered |
| मानु | संभवतः सूर्य | probably the sun |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| कुबिचारी | अविवेकी लोग | misguided thinkers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 129
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 129, 130
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।