बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबरातियोंने अपने-अपने ठहरनेके स्थान देखे तो वहाँ देवताओंके सब सुखोंको सब प्रकारसे सुलभ पाया। इस ऐश्वर्यका कुछ भी भेद कोई जान न सका। सब जनकजीकी बड़ाई कर रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 289 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।।
बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना।।
स्रोत अभिलेख 1.307 · पुस्तक पृ. 289, 289
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।।
English explanation
AI draft: The wedding guests viewed their respective lodgings, where all the comforts enjoyed by the gods were readily available in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | respective |
| बास | ठहरने के स्थान | lodgings |
| बिलोकि | देखकर | having viewed |
| बराती | बारात में आए लोग | wedding guests |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| सुख | सुख-सुविधाएँ | comforts |
| सकल | सभी | all |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily available |
| सब | हर | every |
| भाँती | प्रकार से | in manner |
2 बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना।।
English explanation
No one understood anything of the secret behind this splendor; everyone attributed it to Janaka and praised him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिभव | ऐश्वर्य का | of the splendor |
| भेद | रहस्य | secret |
| कछु | कुछ भी | anything |
| कोउ | कोई | anyone |
| न | नहीं | not |
| जाना | जान पाया | understood |
| सकल | सभी लोग | everyone |
| जनक | राजा जनक | King Janaka, Sita's father |
| कर | का | of |
| करहिं | करते हैं | offer |
| बखाना | प्रशंसा | praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.307
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 289
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 289, 289
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।