बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनारदजीने नामके प्रतापको जाना है। हरि सारे संसारको प्यारे हैं, [हरिको हर प्यारे हैं] और आप (श्रीनारदजी) हरि और हर दोनोंको प्रिय हैं। नामके जपनेसे प्रभुने कृपा की, जिससे प्रह्लाद भक्तशिरोमणि हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 47 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू।।
नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू। भगत सिरोमनि भे प्रहलादू।।
स्रोत अभिलेख 1.26 · पुस्तक पृ. 47, 48
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू।।
English explanation
Narada understood the power of the Name. Hari is dear to the world, and Narada himself is dear to Hari and Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| जानेउ | जान लिया | understood |
| नाम | राम के नाम का | of Rama’s Name |
| प्रतापू | प्रभाव; महिमा | power; glory |
| जग | जगत को | to the world |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| हरि | भगवान विष्णु को | to Lord Vishnu |
| हर | शिव को | to Shiva |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| आपू | स्वयं नारद | Narada himself |
2 नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू। भगत सिरोमनि भे प्रहलादू।।
English explanation
As Prahlada chanted the Name, the Lord bestowed grace, and he became the foremost among devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नामु | भगवान का नाम | the Lord’s Name |
| जपत | जपते हुए; जपने पर | while chanting; upon chanting |
| प्रभु | भगवान ने | the Lord |
| कीन्ह | की | bestowed |
| प्रसादू | कृपा | grace |
| भगत | भक्तों के | among devotees |
| सिरोमनि | श्रेष्ठ; शिरोमणि | foremost; crowning jewel |
| भे | हुए | became |
| प्रहलादू | भक्त प्रह्लाद | Prahlada, the devotee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 47
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 47, 48
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।