बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दध्रुवजीने ग्लानिसे (विमाताके वचनोंसे दुखी होकर सकामभावसे) हरिनामको जपा और उसके प्रतापसे अचल अनुपम स्थान (ध्रुवलोक) प्राप्त किया। हनुमान्जीने पवित्र नामका स्मरण करके श्रीरामजीको अपने वशमें कर रखा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 48 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ।।
सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू।।
स्रोत अभिलेख 1.26 · पुस्तक पृ. 47, 48
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ।।
English explanation
Dhruva chanted Hari’s Name with a wounded heart and attained an unshakable, incomparable station.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ध्रुवँ | ध्रुव ने | Dhruva |
| सगलानि | ग्लानि अथवा मन की पीड़ा सहित | with distress or wounded feelings |
| जपेउ | जपा | chanted |
| हरि | भगवान विष्णु का | of Lord Vishnu |
| नाऊँ | नाम | Name |
| पायउ | प्राप्त किया | attained |
| अचल | स्थिर; अडिग | fixed; unshakable |
| अनूपम | अतुलनीय | incomparable |
| ठाऊँ | स्थान; पद | place; station |
2 सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू।।
English explanation
By remembering the holy Name, Hanuman, the son of the wind god, kept Rama under his sway.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| पवनसुत | पवनपुत्र हनुमान ने | Hanuman, son of the wind god |
| पावन | पवित्र; पवित्र करने वाला | holy; purifying |
| नामू | राम का नाम | Rama’s Name |
| अपने | अपने | his own |
| बस | वश में | under his sway |
| करि | करके | having brought |
| राखे | रख लिया | kept |
| रामू | भगवान राम को | Lord Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 48
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 47, 48
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।