बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारद कहेउ सहित अभिमाना। कृपा तुम्हारि सकल भगवाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनारदजीने अभिमानके साथ कहा—भगवन्! यह सब आपकी कृपा है। करुणानिधान भगवान्ने मनमें विचारकर देखा कि इनके मनमें गर्वके भारी वृक्षका अंकुर पैदा हो गया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 140 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नारद कहेउ सहित अभिमाना। कृपा तुम्हारि सकल भगवाना।।
करुनानिधि मन दीख बिचारी। उर अंकुरेउ गरब तरु भारी।।
स्रोत अभिलेख 1.129 · पुस्तक पृ. 139, 140
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1नारद कहेउ सहित अभिमाना। कृपा तुम्हारि सकल भगवाना।।
English explanation
Narada said with pride, “Lord, all this is your grace.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| कहेउ | कहा | said |
| सहित | साथ | with |
| अभिमाना | अभिमान के | pride |
| कृपा | कृपा | grace |
| तुम्हारि | आपकी | your |
| सकल | सब | all this |
| भगवाना | हे भगवान | O Lord |
2 करुनानिधि मन दीख बिचारी। उर अंकुरेउ गरब तरु भारी।।
English explanation
The compassionate Lord reflected and saw that a mighty tree of pride had sprouted in Narada’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करुनानिधि | करुणा के भंडार भगवान | the Lord, treasury of compassion |
| मन | मन में | in his mind |
| दीख | देखा | saw |
| बिचारी | विचार करके | on reflection |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अंकुरेउ | अंकुरित हुआ | had sprouted |
| गरब | गर्व का | of pride |
| तरु | वृक्ष | tree |
| भारी | विशाल | mighty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 140
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 139, 140
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।