बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी।।
मूल पाठ
नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी।।
अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी। उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी।।
स्रोत अभिलेख 1.21 · पुस्तक पृ. 43, 43
भावार्थ
मूल पाठ के बादनाम और रूपकी गतिकी कहानी (विशेषताकी कथा) अकथनीय है। वह समझनेमें सुखदायक है, परन्तु उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। निर्गुण और सगुणके बीचमें नाम सुन्दर साक्षी है और दोनोंका यथार्थ ज्ञान करानेवाला चतुर दुभाषिया है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 43 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी।।
English explanation
The account of the relation between name and form is ineffable: understanding it brings joy, but it cannot be expressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाम | नाम की | of the name |
| रूप | और रूप की | and of the form |
| गति | स्थिति; संबंध का स्वरूप | nature; manner of relationship |
| अकथ | अकथनीय | ineffable |
| कहानी | कथा; वर्णन | account; story |
| समुझत | समझने पर | when understood |
| सुखद | सुख देने वाली | joy-giving |
| न | नहीं | not |
| परति | हो पाती | can be |
| बखानी | वर्णित; कही गई | described; expressed |
2 अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी। उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी।।
English explanation
Between the attributeless and the qualified divine, the name is a trustworthy witness—a skillful interpreter that makes both understood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगुन | गुणों से रहित ईश्वर | God without attributes |
| सगुन | गुणों सहित ईश्वर | God with attributes |
| बिच | बीच में | between |
| नाम | ईश्वर का नाम | God’s name |
| सुसाखी | उत्तम साक्षी | a trustworthy witness |
| उभय | दोनों का | of both |
| प्रबोधक | बोध कराने वाला | making understood |
| चतुर | कुशल; समझदार | skillful; discerning |
| दुभाषी | दो पक्षों की बात समझाने वाला दुभाषिया | an interpreter between two sides |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 43
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 43, 43
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।