बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दब्रह्माके बनाये हुए इस प्रपञ्च (दृश्य जगत्) से भलीभाँति छूटे हुए वैराग्यवान् मुक्त योगी पुरुष इस नामको ही जीभसे जपते हुए [तत्त्वज्ञानरूपी दिनमें] जागते हैं और नाम तथा रूपसे रहित अनुपम, अनिर्वचनीय, अनामय ब्रह्मसुखका अनुभव करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 43 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।।
ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा।।
स्रोत अभिलेख 1.22 · पुस्तक पृ. 43, 44
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।।
English explanation
AI draft: Dispassionate yogis, detached from the world fashioned by Brahma, remain spiritually awake by repeating Rama’s name with their tongues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाम | राम का नाम | Rama’s name |
| जीहँ | जीभ से | with the tongue |
| जपि | जपकर | having repeated |
| जागहिं | आध्यात्मिक रूप से जागते हैं | remain spiritually awake |
| जोगी | योगी | practitioners of yoga |
| बिरति | वैराग्यवान | dispassionate |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का | of Brahma, the creator |
| प्रपंच | संसार के विस्तार से | from the manifested world |
| बियोगी | अलग रहने वाले | remaining detached |
2 ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा।।
English explanation
They experience the incomparable bliss of Brahman, which is indescribable, free from affliction, and without name or form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मसुखहि | ब्रह्म के आनंद को | the bliss of Brahman |
| अनुभवहिं | अनुभव करते हैं | experience |
| अनूपा | अनुपम | incomparable |
| अकथ | कहा न जा सकने वाला | indescribable |
| अनामय | रोग और विकार से रहित | free from affliction and impairment |
| नाम | नाम | name |
| न | नहीं है | has no |
| रूपा | रूप | form |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 43
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 43, 44
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।